
तीन बेनामी मोबाइल और महिला वकील से 186 कॉल: बर्खास्त JMFC को हाई कोर्ट से राहत नहीं
न्यायिक अधिकारी के आचरण को हाई कोर्ट ने माना गंभीर, कहा- न्यायपालिका में भरोसा बनाए रखने के लिए वकीलों से उचित दूरी जरूरी
अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अमृतलाल विजोडा को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए उनकी न्यायिक सेवा से बर्खास्तगी के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने माना कि उनके खिलाफ साबित आरोप मामूली नहीं थे, बल्कि न्यायिक अधिकारी की ईमानदारी और मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े करते थे।
मामला वर्ष 2008 का है, जब विजोडा को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ कुल 12 आरोप लगाए गए थे। विभागीय जांच के बाद इनमें से चार आरोप साबित माने गए। इसके बाद वर्ष 2016 में उन्हें न्यायिक सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। विजोडा ने इस कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
तीन अलग-अलग नामों पर मोबाइल कनेक्शन
मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक तीन मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार ये मोबाइल कनेक्शन अलग-अलग लोगों के नाम पर दर्ज थे। इनमें से एक कनेक्शन एक प्रैक्टिसिंग महिला वकील के नाम पर था।
जांच में सामने आया कि जून 2007 से मार्च 2008 के बीच विजोडा ने संबंधित महिला वकील से 186 बार फोन पर बातचीत की थी। इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार के आरोपी व्यक्ति के संपर्क में रहने का भी आरोप था।
मनचाहे आदेश के लिए पैसे लेने का भी आरोप
विजोडा पर मनचाहे न्यायिक आदेश पारित करने के लिए पैसे लेने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए थे।
इसके साथ ही विभाग को जानकारी दिए बिना कार खरीदने और व्यक्तिगत ऋण लेने से संबंधित आरोप भी लगाए गए थे।
विभागीय जांच में 12 में से चार आरोप साबित हुए।
हाई कोर्ट ने कहा- न्यायिक अधिकारी को वकीलों से दूरी रखनी चाहिए
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के आचरण को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई न्यायिक अधिकारी किसी प्रैक्टिसिंग वकील से फोन लेता है और कुछ समय तक उसके संपर्क में रहता है, तो यह अपने आप में न्यायिक मर्यादा के लिहाज से अनुचित आचरण हो सकता है।
कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रैक्टिसिंग वकीलों से उचित दूरी बनाए रखें और उच्च स्तर की मर्यादा कायम रखें।
बर्खास्तगी को माना उचित
हाई कोर्ट ने कहा कि साबित आरोप मामूली शिकायतें नहीं थीं, बल्कि ऐसे आचरण को दर्शाते थे जो न्यायिक अधिकारी की ईमानदारी पर गंभीर सवाल उठाता है।
कोर्ट को विजोडा पर लगाई गई सजा में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं मिला।
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी।
स्रोत दैनिक जागरण
EYEBREAKINGNEWS
Editor in chief
राजेश बागवान माली
हमारी खबर आपकी नज़र

Leave a comment
Your email address will not be published. Required fields are marked *