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अपनी कीमत पहचानो, दूसरों की राय से नहीं

Sep 24, 2026  राजेश बागवान माली 43 views
अपनी कीमत पहचानो, दूसरों की राय से नहीं

अपनी कीमत पहचानो, दूसरों की राय से नहीं


विशेष आलेख। जीवन में कई बार हम अपनी योग्यता और क्षमता का आकलन दूसरों की राय के आधार पर करने लगते हैं। लेकिन एक व्यक्ति का वास्तविक मूल्य इस बात से तय नहीं होता कि दूसरे उसे किस नजर से देखते हैं।

इसी संदेश को बेहद सरल और प्रभावी ढंग से समझाने वाली यह प्रेरक लोककथा हमें अपनी पहचान और क्षमता को समझने की सीख देती है।


एक बार एक युवक एक ज्ञानी महात्मा के पास पहुंचा और पूछा, “गुरुजी, मेरे जीवन का वास्तविक मूल्य क्या है?”

महात्मा मुस्कुराए और उन्होंने युवक को एक चमकता हुआ पत्थर दिया। उन्होंने कहा, “इसे बाजार में ले जाओ और अलग-अलग लोगों से इसकी कीमत पूछकर आओ। लेकिन ध्यान रखना, इसे बेचना नहीं है।”


संतरे वाले ने लगाए 10 संतरे
युवक सबसे पहले संतरे बेचने वाले के पास पहुंचा। उसने पत्थर दिखाकर उसकी कीमत पूछी। संतरे वाले ने पत्थर को देखा और कहा कि इसके बदले वह युवक को 10 संतरे दे सकता है।

युवक ने पत्थर बेचने से इनकार किया और आगे बढ़ गया।

सब्जी वाले ने बताई एक बोरी आलू की कीमत
इसके बाद युवक एक सब्जी विक्रेता के पास पहुंचा। सब्जी वाले ने पत्थर को ध्यान से देखा और कहा कि इसके बदले वह उसे एक बोरी आलू दे सकता है।


युवक ने फिर मना कर दिया और आगे चला गया।


सुनार ने पहचानी असली कीमत
अब युवक एक सुनार की दुकान पर पहुंचा। सुनार ने पत्थर को ध्यान से देखा, उसे साफ किया और परखा।

जांच के बाद वह हैरान रह गया।

सुनार ने बताया कि यह कोई साधारण पत्थर नहीं, बल्कि बेशकीमती लाल माणिक है।

उसने इसके बदले युवक को 50 लाख रुपये देने की पेशकश की।


लेकिन युवक ने महात्मा की बात याद रखते हुए पत्थर बेचने से इनकार कर दिया।
जौहरी ने बताया—अतुलनीय है इसकी कीमत

अंत में युवक एक प्रसिद्ध जौहरी के पास पहुंचा। जौहरी ने विशेष लेंस से पत्थर की जांच की। कुछ देर बाद उसने पत्थर को बेहद सम्मान के साथ वापस युवक को सौंप दिया।


जौहरी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्लभ और अनमोल रत्न है। इसकी कीमत सामान्य पैमाने से तय नहीं की जा सकती।


युवक को अब महात्मा की बात समझ आने लगी थी।


महात्मा ने समझाया जीवन का सबसे बड़ा सत्य
युवक वापस महात्मा के पास पहुंचा और पूरी घटना बताई। महात्मा ने कहा—
“जिस प्रकार एक ही पत्थर की कीमत अलग-अलग लोगों ने अपनी समझ के अनुसार लगाई, उसी तरह लोग तुम्हारी योग्यता और क्षमता का आकलन भी अपनी समझ के अनुसार करेंगे।

कोई तुम्हें कम आंकेगा तो कोई अधिक, लेकिन इससे तुम्हारा वास्तविक मूल्य नहीं बदलता।”


महात्मा ने युवक को समझाया कि जीवन में दूसरों की राय को अपनी पहचान का पैमाना नहीं बनाना चाहिए।

व्यक्ति को अपनी क्षमताओं, मेहनत और प्रतिभा को पहचानना चाहिए।

कथा की सीख
दूसरों की राय से अपनी कीमत तय मत करो। हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेष प्रतिभा और क्षमता होती है।

जरूरी यह है कि हम स्वयं को पहचानें और सही स्थान तथा सही लोगों के बीच अपनी क्षमता को विकसित करें।


याद रखें—हीरे की कीमत कोई सब्जी वाला नहीं बता सकता।

अपनी असली कीमत पहचानने के लिए सही नजर और सही पहचान जरूरी है।


EYEBREAKINGNEWS
Editor in chief 
राजेश बागवान माली 
हमारी खबर आपकी नज़र


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