
कोसमी में आदिवासियों के आशियानों पर संकट!
शिवराज सिंह चौहान धरने बैठे
वन विकास निगम की कार्रवाई से बढ़ा विवाद, शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप की चर्चा
सीहोर जिले के कोसमी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर आदिवासी परिवारों की चिंता बढ़ी; केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अधिकारियों को घर नहीं गिराने के निर्देश देने का दावा, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार।
कोसमी/सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विकास निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया है। कार्रवाई से आदिवासी परिवारों के मकानों और खेतों को नुकसान पहुंचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वर्षों से यहां निवास कर रहे परिवारों के सामने आशियाना बचाने की चिंता खड़ी हो गई है। इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप को लेकर भी चर्चा हो रही है।
वन विकास निगम की कार्रवाई से आदिवासी परिवार चिंतित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोसमी और आसपास के क्षेत्र में वन विकास निगम द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि इस दौरान आदिवासी परिवारों के मकान हटाए गए हैं
और खेतों में लगी मक्का की फसल को भी नुकसान पहुंचा है।
कार्रवाई से प्रभावित परिवारों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, कितने परिवार प्रभावित हुए हैं और कितने मकानों को नुकसान पहुंचा है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप को लेकर चर्चा
कोसमी क्षेत्र केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के विदिशा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने आदिवासी परिवारों को परेशान नहीं करने और उनके मकान नहीं गिराने के संबंध में जिला प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों से चर्चा की थी।
इसके बावजूद कार्रवाई जारी रहने के आरोप सामने आए हैं।
हालांकि, मंत्री के निर्देशों और प्रशासन की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना और बेघर होने की चिंता
सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकानों पर कार्रवाई का मामला कई सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रभावित परिवारों के दावों और उनके निवास संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई है? क्या पात्र परिवारों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई है? यदि परिवार लंबे समय से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, तो उनके अधिकारों और कानूनी स्थिति का निर्धारण किस प्रक्रिया के तहत किया गया है?
प्रशासन के रुख पर टिकी नजरें
वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में संबंधित कानूनों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है।
वहीं, प्रभावित आदिवासी परिवारों के दावों, पात्रता और लागू कानूनी संरक्षण पर भी नियमानुसार विचार किया जाना आवश्यक है।
अब निगाहें जिला प्रशासन, वन विकास निगम और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष पर हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि कार्रवाई किन आधारों पर की गई, कितने परिवार प्रभावित हुए और उन्हें राहत या पुनर्वास देने के संबंध में क्या कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, कोसमी का यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई, आदिवासी परिवारों के अधिकारों और उनके आवास की सुरक्षा को लेकर चर्चा में है।
EYEBREAKINGNEWS
Editor in chief
राजेश बागवान माली
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