
कोसमी में आदिवासियों के मकान तोड़ने पर CM मोहन यादव सख्त, मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट
शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी के बाद मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, बोले— जल्द सामने आएगी सच्चाई
भोपाल/सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वन विकास निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर उठे विवाद के बीच
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है।
12 अक्टूबर 2026 को सामने आए मुख्यमंत्री के बयान के मुताबिक, उन्होंने कहा, "मैंने इस मामले में मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है, जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी।" मुख्यमंत्री ने मामले में तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने का भरोसा दिलाया है।
12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला
जानकारी के अनुसार, कोसमी गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान बारेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़े गए। कार्रवाई के दौरान खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने और कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने की बात भी सामने आई है। इस घटना के बाद प्रभावित परिवारों के सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
वन विकास निगम की ओर से कार्रवाई को वन भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बताया गया है। वहीं, प्रभावित परिवारों के मामले को लेकर कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने जताई कड़ी नाराजगी
केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी पहुंचकर प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की और कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया।
शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव से फोन पर बात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की कार्रवाई से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा की छवि खराब हो सकती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आदिवासी परिवारों के साथ न्याय होना चाहिए और प्रभावित लोगों को राहत मिलनी चाहिए।
अब रिपोर्ट पर टिकी नजरें
शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब मुख्य सचिव की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई, संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही और नियमों का पालन किस तरह किया गया।
फिलहाल, प्रभावित आदिवासी परिवारों को राहत देने और कार्रवाई की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच को लेकर निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
EYEBREAKINGNEWS
Editor in chief
राजेश बागवान माली
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