
बुधनी के सनसनीखेज हत्या मामले में चारों आरोपी दोषमुक्त,
अदालत ने अभियोजन साक्ष्य को माना अविश्वसनीय
बुधनी | 20 सितंबर 2026
2021 में खदान में मिला था युवक का शव, हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में चल रहा था
मामला
बुधनी क्षेत्र के एक चर्चित एवं सनसनीखेज हत्या प्रकरण में न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बुधनी ने 16 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को विसंगतिपूर्ण एवं अविश्वसनीय मानते हुए आरोपियों के विरुद्ध हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप प्रमाणित नहीं माने।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, सेमरी, रेहटी निवासी जागेश्वर यादव ने पुलिस को सूचना दी थी कि 11 नवंबर 2021 की रात करीब 8:30 बजे उसका भाई बब्बन यादव खेत में पानी फेरने के लिए गया था। वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
13 नवंबर 2021 को अर्पण वेयरहाउस के पीछे गुल्लू सेठ की क्रेशर खदान में बब्बन यादव का शव पानी में तैरता हुआ मिला। शव पर चोट के कई निशान बताए गए थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम सहित आवश्यक कार्रवाई कर जांच शुरू की।
पुलिस की जांच में क्या सामने आया?
पुलिस की विवेचना के अनुसार, धर्मेंद्र सोलंकी, राजेंद्र मंडलोई, जितेंद्र मंडलोई और गोपाल, सभी निवासी सेमरी, 11 नवंबर 2021 की रात बंद पड़ी विजय स्टोन क्रेशर मशीन पर चोरी करने गए थे।
आरोप था कि इसी दौरान बब्बन यादव वहां पहुंच गया और टॉर्च की रोशनी में आरोपियों को पहचान लिया।
उसने अगले दिन गुल्लू सेठ को चोरी की जानकारी देने की बात कही। अभियोजन के अनुसार, इसके बाद आरोपियों ने बब्बन पर बोल्ट, डंडे और पत्थरों से हमला किया,
जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में शव को खदान में फेंकने का आरोप लगाया गया।
पुलिस ने राजेंद्र मंडलोई और जितेंद्र मंडलोई को रायसेन जिले के गोधरा गांव से, धर्मेंद्र सोलंकी को सेमरी से और गोपाल को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से गिरफ्तार किया था।
जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन साक्ष्य को न्यायालय ने माना अविश्वसनीय
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने विभिन्न साक्ष्य प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण और रिकॉर्ड पर आए तथ्यों के आधार पर अभियोजन की कहानी को विसंगतिपूर्ण एवं अविश्वसनीय माना।
न्यायालय ने धारा 302, 201 एवं 34 भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप प्रमाणित नहीं पाए
और चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने की पैरवी
प्रकरण में आरोपियों की ओर से
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री डी.पी. तिवारी, अधिवक्ता के.के. तिवारी एवं मनीष शर्मा ने पैरवी की।
स्रोत: उपलब्ध कराई गई प्रकरण संबंधी जानकारी।
EYEBREAKINGNEWS
Editor in chief
राजेश बागवान माली
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