
DNA रिपोर्ट से बदला रेप केस का फैसला: हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा रद्द कर
आरोपी को किया बरी
सिवनी | 21 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से जुड़े दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा रद्द कर दी।
फैसले में DNA रिपोर्ट की अहम भूमिका रही, जिसमें आरोपी और पीड़िता के बच्चे का DNA मैच नहीं हुआ।
DNA रिपोर्ट के आधार पर मिला संदेह का लाभ
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लखनादौन निवासी तीरथ उर्फ छोटू टेकाम पर पड़ोस में रहने वाली मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप था।
मामले में जिला न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई थी।
आरोपी ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति देव नारायण मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान DNA रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता और नवजात बच्चे का DNA आपस में मेल खाता था,
लेकिन आरोपी और बच्चे का DNA मैच नहीं हुआ।
अदालत ने DNA साक्ष्य के आधार पर आरोपी को बच्चे का जैविक पिता नहीं माना और संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया।
मामले में गवाही भी हुई थी
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने भी आरोपी के खिलाफ बयान दिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के माता-पिता काम के सिलसिले में नागपुर गए थे।
लौटने के बाद मामले की जानकारी सामने आई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
स्रोत: नवभारत टाइम्स
EYEBREAKINGNEWS
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राजेश बागवान माली
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