
नीम करोली बाबा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल को भी कराया इंतजार! 20 मिनट तक बजता रहा फोन, जानिए क्या था पूरा किस्सा
विशेष रिपोर्ट | EYEBREAKINGNEWS
भोपाल। हाल ही में रिलीज हुई चर्चित फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
फिल्म में उनके जीवन, हनुमान भक्ति और आध्यात्मिक यात्रा को केंद्र में रखा गया है।
नीम करोली बाबा को उनके अनुयायी महाराजजी के नाम से भी संबोधित करते थे। उनका मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। उनके जीवन से जुड़े अनेक प्रसंग आज भी भक्तों के बीच सुनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित किस्सा मध्य प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।
जब राज्यपाल को करना पड़ा 20 मिनट इंतजार
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बाबा नीम करोली से बातचीत करने के लिए मध्य प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल की ओर से फोन किया गया था। उस समय बाबा ध्यान में लीन थे। फोन आने की जानकारी मिलने के बावजूद बाबा ने तत्काल बातचीत नहीं की और राज्यपाल को करीब 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।
यह प्रसंग बाबा के उस स्वभाव को दर्शाने के लिए सुनाया जाता है, जिसमें वे पद, प्रतिष्ठा और राजसी हैसियत से प्रभावित नहीं होते थे। उनके लिए आध्यात्मिक साधना और व्यक्ति की आंतरिक अवस्था अधिक महत्वपूर्ण थी। यह किस्सा लेखक केशव दास की पुस्तक में वर्णित होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
राजा हो या आम इंसान, बाबा के लिए सब बराबर
नीम करोली बाबा के भक्तों द्वारा बताए गए अनुभवों में बार-बार उनकी सादगी और समान दृष्टि का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि उनके आश्रम में आने वाले व्यक्ति की पहचान उसके पद या धन से नहीं, बल्कि उसकी श्रद्धा और भावना से होती थी।
यही वजह है कि उनके जीवन से जुड़े छोटे-छोटे प्रसंग आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। राज्यपाल से जुड़ा यह किस्सा भी इसी विचार को सामने रखता है कि बाबा के लिए सामाजिक पद से अधिक महत्व इंसान और उसकी साधना का था।
‘हनुमान अंश’ के बाद फिर बढ़ी चर्चा
नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ के सिनेमाघरों में चर्चा में आने के बाद बाबा के जीवन और उनसे जुड़े पुराने किस्सों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। फिल्म उनके आध्यात्मिक जीवन और हनुमान भक्ति को केंद्र में रखती है।
नीम करोली बाबा का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उनके आध्यात्मिक विचारों से जुड़े कई विदेशी अनुयायी भी रहे हैं। उनके प्रमुख अनुयायियों में राम दास का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।
एक प्रसंग, कई सवाल
राज्यपाल को 20 मिनट तक इंतजार कराने वाला यह प्रसंग इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आज के दौर में आमतौर पर किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है। लेकिन बाबा नीम करोली के बारे में सुनाए जाने वाले इस प्रसंग में तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है।
हालांकि, इस घटना को बाबा के भक्तों और पुस्तक में वर्णित प्रसंग के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
रिपोर्ट: EYEBREAKINGNEWS

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