
जन्म-मृत्यु के देरी से पंजीयन के नियम बदले, अक्टूबर से नए प्रावधान लागू
एक से दो साल के भीतर पंजीयन के लिए एसडीएम या अधिकृत मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी, दो साल बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य
भोपाल। जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीयन नहीं होने पर अब देरी से पंजीयन कराने की प्रक्रिया बदल गई है।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13 में किए गए संशोधन अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं।
इसके तहत देरी से होने वाले पंजीयन के लिए अलग-अलग अवधि के अनुसार सक्षम अधिकारी का आदेश लेना जरूरी होगा।
एक से दो साल की देरी पर मजिस्ट्रेट का आदेश
अगर किसी जन्म या मृत्यु का पंजीयन एक साल से ज्यादा, लेकिन दो साल के भीतर कराया जाता है, तो रजिस्ट्रार सीधे पंजीयन नहीं कर सकेगा।
ऐसे मामले में जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
दो साल से ज्यादा पुराना मामला तो न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति
अगर जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो साल बाद दी जाती है, तो पंजीयन के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना होगा। इसके बाद ही रजिस्ट्रार पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा।
अधिकारियों को नए नियमों की जानकारी देने के निर्देश
भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय और मध्यप्रदेश संचालनालय ने इस संबंध में सभी कलेक्टर और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को निर्देश जारी किए हैं।
कलेक्टरों से कहा गया है कि वे अपने जिले के सभी रजिस्ट्रार, उप-रजिस्ट्रार और जन्म-मृत्यु पंजीयन से जुड़े अधिकारियों को नए नियमों की जानकारी दें। अधिकारियों को अक्टूबर 2026 से संशोधित नियमों के अनुसार ही देरी से होने वाले जन्म और मृत्यु के पंजीयन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई व्यवस्था का उद्देश्य देरी से आने वाले जन्म और मृत्यु के मामलों में सही प्रक्रिया अपनाना और संबंधित सक्षम अधिकारी की अनुमति सुनिश्चित करना है।
EYEBREAKINGNEWS
Editor in chief
राजेश बागवान माली
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