लालच
लालच मनुष्य की वह इच्छा है, जिसमें जरूरत से अधिक पाने की चाह कभी समाप्त नहीं होती। धन, संपत्ति, पद या प्रतिष्ठा का लालच इंसान को सही और गलत के बीच का अंतर भुला सकता है।
लालच में व्यक्ति बहुत कुछ पाने के बावजूद संतुष्ट नहीं होता। धीरे-धीरे यही असंतोष रिश्तों, सम्मान और मानसिक शांति को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
“जरूरत पूरी होने पर संतोष मिलता है, लेकिन लालच बढ़ने पर जरूरत कभी पूरी नहीं होती।”
इसलिए जीवन में मेहनत कमाई का साधन हो, संतोष धन हो और ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी हो। 🙏

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